2018 में सर्वश्रेष्ठ: हिंदी फिल्म

Best Hindi Films of 2018

दीपा गहलोत

हिंदी फिल्म जगत में 2018 का साल सबसे ज्यादा उलटफेर करने वाले साल के रुप में जाना जाएगा। इस साल बड़े बड़े सुपरस्टार्स का जलवा बॉक्स ऑफिस पर फीका रहा और अच्छी कहानी और बड़े दिल वाली छोटे बजट की फिल्मों का बोलबाला । अगर ये साल हिंदी फिल्म जगत में रचनात्मकता की नई बहार नहीं ला पाया तो फिर किसी और से कोई उम्मीद मत रखिएगा।

ऐसा कम होता है लेकिन इस बार साल 2018 की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को चुनने में खासी दिक्कत आई। ये सूची रीलिज की तारीख के हिसाब से है ना कि श्रेष्ठता के लिहाज से।

पैडमैन फ़िल्म 1. पैडमैन

असल जिंदगी के हीरो अरुणाचलम मुरुगनाथम की जिंदगी पर आधारित आर बल्की की इस फिल्म में अक्षय कुमार, राधिका आप्टे और सोनम कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई है। इस फिल्म ने ना सिर्फ मासिक धर्म को लेकर सदियों पुरानी वर्जनाओं को चुनौती दी बल्कि देश में सैनिटरी पैड्स को लेकर एक नई चर्चा भी शुरु की।

अक्टूबर फ़िल्म 2. अक्टूबर

शूजित सरकार की इस फिल्म में वरुण धवन ने अपनी युवा जोश से भरपूर छवि से हटकर होटल मैनेजमेंट के ट्रेनी की एक गंभीर भूमिका निभाई है, जिसकी जिंदगी उसके एक सहकर्मी ( बनीता संधू) के होटल की छत से गिरने के बाद उथल पुथल हो जाती है, क्योंकि कोमा में जाने से पहले वो वरुण के बारे में ही पूछती है।

राज़ी फ़िल्म 3. राज़ी

मेधना गुलजार के निर्देशन में बनी राज़ी एक बेहद कसी हुई जासूसी फिल्म है जो हरिंदर सिक्का की किताब ‘कॉलिंग सहमत’ पर आधारित है। फिल्म में आलिया भट्ट ने भारत के लिए 1971 के युद्ध से पहले जासूसी करने के लिए पाकिस्तान के एक सैन्य परिवार में शादी करने वाली एक युवा लड़की की जबरदस्त भूमिका निभाई है।

परमाणु फ़िल्म 4. परमाणु – द स्टोरी ऑफ पोखरन

जान एब्राहम के मुख्य किरदार वाली इस फिल्म को अभिषेक शर्मा के निर्देशन ने 1998 में भारत के गुप्त परमाणु कार्यक्रम को रोमांच , एक्शन और देशभक्ति की चाशनी में लपेट कर प्रस्तुत किया है।

 

मुल्क फ़िल्म 5. मुल्क

ऋषि कपूर और तापनी पन्नू की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फिल्म का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया है। ये फिल्म कट्टर राष्ट्रवाद और नफरत भरे इस माहौल में देशभक्ति के मूलभूत सिद्धांतों को लेकर दोबारा बातचीत शुरु करने पर मजबूर करती है।

 

6. स्त्री

स्त्री फ़िल्म

अमर कौशिक ने कॉमेडी और दहशत का शानदार मिक्स करने में सफल रहे हैं। हर रोल में गिरगिट की तरह रंग बदलकर उसे अपना बना लेने वाले राजकुमार राव ने फिल्म में एक छोटी जगह के दर्जी की भूमिका निभाई है जो एक औरत ( श्रद्धा कपूर) से इश्क कर बैठते हैं जो एक भूतनी भी हो सकती है।

 

सुई धागा फ़िल्म 7. सुई धागा

शरत कटारिया की इस फिल्म में वरुण धवन और अनुष्का शर्मा अपनी हाई क्लास छवि से उलट एक साधारण निम्म मध्यमवर्गीय दंपत्ति बने हैं जो अपने सपनों को सच करने के लिए संघर्ष करता है। ये फिल्म आधुनिक भारत की परीकथा जैसा एहसास देगी आपको।

अंधाधुंध फ़िल्म 8. अंधाधुन

श्रीराम राघवन की इस फिल्म की पटकथा जबरदस्त सस्पेंस है। फिल्म की कहानी एक अंधे पियानो बजाने वाले संगीतकार (आयुष्मान खुराना)  और एक बेवफा सुंदरी (तब्बू) के इर्द गिर्द घूमती है। अनिल धवन ने इसमें पुराने जमाने के बॉलीवुड स्टार की भूमिका जीवंत की है ।

तुंमबाद फ़िल्म 9. तुंमबाद

राही अनिल बर्वे ने बॉलीवुड को इस फिल्म से ये बताया है कि हॉरर फिल्म बिना घिसे पिटे हथकंडे इस्तेमाल किए भी बनाई जा सकती है। इस फिल्म के सेट्स शानदार हैं और सोहम शाह स्टारर ये फिल्म बेहद डरावनी है।

बधाई हो फ़िल्म 10. बधाई हो

ये बिना शक इस साल की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली फिल्म है । अमित रविंद्रनाथ शर्मा ने फिल्म में जबरदस्त ढंग से दिखाया है कि दिल्ली में रहने वाले एक सामान्य परिवार में क्या होता जब एक अधेड़ मां-बाप (नीना गुप्ता, गजराज राव) को पता चलता है कि उन्हें बच्चा होन वाला है। फिल्म में दिखाया गया है कि इस बात को कैसे उनके दोनों बेटों (आयुष्मान खुराना, शार्दूल राणा) और चिड़चिड़ी दादी (सुरेखा सिकरी) अपने आस पास के लोगों की प्रतिक्रिया झेलती हैं।

अनुवाद- ईश्वरी क्रिएशंस

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