सिर्फ उन्मादी ऊर्जा ही है बॉम्बैरिया की असल ताकत

Bombariya movie review featuring Radhika Apte

दीपा गहलोत

पहली बार निर्देशक में कदम रख रहीं पिया सुकन्या का बॉम्बैरिया जैसी दुस्साहसी फिल्म बनाने की कोशिश करना ही तारीफ के काबिल है क्योंकि कहानी में इतने किरदार हैं और उन सबमें इतना कुछ चल रहा है कि उसे एक कसी हुई फिल्म के तौर पर पर्दे पर उतारना बड़े बड़े निर्देशकों के लिए भी लगभग असंभव है।

कुछ मिनटों के बेतरतीब झलक के बाद अगर दर्शक कोलाहल में खोने की बजाए ये सोचने लगें कि अरे यार…ये क्या है ? तो समझ जाइये कि फिल्म संकट में है। ये सारा कोलाहल शुरु होता है जब पीआर में काम करने वाली मेघना (राधिका आप्टे) का ऑटो प्रेम (सिद्धांत कूपर) की स्कूटर से टकरा जाता है और वो उसका फोन छीन कर भाग जाता है। फोन गायब होने से मेघना जिस फिल्म स्टार करन कपूर (रवि किशन) का काम देख रही थी, वो तो गड़बड़ होता ही है लेकिन फोन में एक उत्तेजक वीडियो भी होता है जो किसी भी कीमत पर लीक नहीं होना चाहिए।

घटना का चश्मदीद पिंटू (अक्षय ओबरॉय) मदद के लिए आगे आता है लेकिन वो भी इस गड़बड़झाले में फंस जाता है क्योंकि मेघना ना केवल उसकी कार में लिफ्ट लेती है बल्कि काबू से बाहर होते हालात को संभालने के लिए उसके फोन से एक कॉल करती है। उधर एक सामान की डिलेवरी देने जा रहा प्रेम भी मुसीबत में फंसा रहता है और उसे लगता है कि एक हत्यारा (अमित सियाल) उसे जान से मारना चाहता है। सारे मामले की डोर जेल से बैठे बैठे एक नेता (आदिल हुसैन) घुमाता रहता है जिसे एक रहस्यमयी गवाह को अपने खिलाफ गवाही से रोकना होता है।

इस पूरी रस्साकशी में पुलिस, गैंगस्टर, विचित्र घटनाक्रम को समझने की कोशिश करते मां बाप, करन की नेता पत्नी (शिल्पा शुक्ला) और शूटिंग छोड़कर कहीं अनजानी जगह चले गए स्टार से मिलने का वादा लिए दो फैन शामिल हैं।

फिल्म में सारे किरदार एक दूसरे से टकराते रहते हैं मानो मुंबई महानगर नहीं कोई गांव हो। फिल्म में किरदार दूर दराज के इलाकों में भी रिकॉर्ड समय पर पहुंच जाते हैं और मजे की बात ये है कि पहुंचने के दरम्यान उन्हें कोई ट्रैफिक जाम भी नहीं मिलता, फिल्म में फोन कॉल का जवाब हमेशा गलत आदमी ही देता है और एक समय ऐसा भी आता है जब एक्टरों ने भी थककर इस उलझी स्क्रिप्ट में थोड़ी अक्ल डालने की कोशिश करना छोड़ देते हैं।

फिल्म में निश्चित तौर पर कुछ कुछ जगहों पर हंसी आती है और कई सीन में एक्टर्स की उन्मादी उर्जा भी दिखती है लेकिन ये सारी कोशिशें ज्यादा लंबे समय तक दर्शकों की रुचि को बनाए रखने में असफल रहती है क्योंकि कई बार कॉमेडी सीनों में दोहराव हुआ है। फिल्म की एडिटर (अंतरा लाहिड़ी) को इस फिल्म को एडिट कर उसे खड़ा करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी होगी तभी इस फिल्म में एक रुपता दिखती है।

आखिर में यही कहा जाता सकता है कि बॉम्बैरिया चश्मदीद सुरक्षा कार्यक्रम पर एक बड़ा सवाल उठाता है लेकिन इस फिल्म का असली संदेश है कि किसी दूसरे के पचड़े में ना पड़े और कभी भी अपना फोन किसी अजनबी को ना दें।

फिल्म – बॉम्बैरिया

निर्देशक – पिया सुकन्या

कलाकार- राधिका आप्टे, सिद्धांत कपूर, अक्षय ओबरॉय, अमित सियाल, आदिल हुसैन और अन्य

रेटिंग – 2 स्टार 

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