बेढंगा, उबाऊ और हद दर्जे का बेतुका


The Accidental Prime Minister movie review

दीपा गहलोत

विजय रत्नाकर गुट्टे द्वारा निर्देशित और संजय बारु की किताब पर आधारित द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर फिल्म गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधने की एक बेहद बेढंगी कोशिश है जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को भद्दे ढंग से कठपुतली दिखाया गया है।

पता नहीं अनुपम खेर को क्या सूझी कि वो मिमयाती आवाज वाले और अपने झुके हुए शरीर के सामने अजीब ढंग से सामने हाथ रखकर इधर उधर घसीटते हुए चलते डॉक्टर सिंह की भूमिका निभाने चले।फिल्म की कहानी को पत्रकार संजय बारू ( अक्षय खन्ना ) के चश्मे से देखा गया है जिसमें वो राजनीति की धोखा देने वाली परंपरा में कमजोर प्रधानमंत्री को बचाने की कोशिशें करते दिखते हैं।

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे दलों के गठबंधन यूपीए में सबसे कम आक्रामक उम्मीदवार डॉक्टर सिंह को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाया जाता है क्योंकि यूपीए में विदेश में जन्मीं सोनिया गांधी ( सुजैन बर्नर्ट ) के खिलाफ कड़ा विरोध होता और राहुल अभी राजनीति में कच्चे ही रहते हैं।

चेहरे पर हमेशा बनावटी हंसी लिए बारु कई बार सीधे कैमरा से बात करते हैं ताकि समझा सकें कि खतरनाक नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों से घिरे पीएमओ ( दफ्तर का सेटअप इतना भड़कीला है कि आंखों में चुभता है ) में चल क्या रहा है। फिल्म में सबसे खतरनाक अहमद पटेल ( विपिन शर्मा ) को दिखाया गया है जो सोनिया गांधी के करीबी हैं और ये मानते हैं कि सरकार की असली चाभी उनके ही हाथों में है।

डॉक्टर सिंह के दस साल के कार्यकाल में काफी कुछ हुआ लेकिन फिल्म में उसको दिखाने में लापरवाही बरती गई है । अमेरिका से परमाणु संधि, राहुल गांधी के नखरे और बारु द्वारा आयोजित मीडिया के छलकपट को दिखाने में बेमतलब का समय बर्बाद किया गया है। फिल्म में दिखाया गया है कि परिवार के दबाव का डॉक्टर सिंह अपने ही तरीके से सामना करते हैं और जब उन्हें बीजेपी को आखिरकार चुनाव में जीत दिलाने वाले यूपीए के सभी घोटालों और भ्रष्टाचार के लिए बलि का बकरा बनाया जाता है तो डॉक्टर सिंह आखिरकार चुप्पी साध लेते हैं ( जिसका लंबे समय तक मजाक भी उड़ाया गया है ) ।

ये भारतीय राजनीति की गंदी दुनिया को एक साफ सुथरे इंसान की आंखों से देखने वाली एक पैनी फिल्म बन सकती थी लेकिन ये बेहद उबाऊ, भ्रमित और हद दर्जे की बेतुकी फिल्म बन गई। दर्शक फिल्म देखते हुए इस बात से मन बहला सकते हैं कि फिल्म में कौन सा कलाकार असल जिंदगी के किस किरदार से मिलता जुलता है। आश्चर्य की बात ये है कि अक्षय खन्ना हर सीन में एक नए सूट में नजर आते हैं और बिल्कुल भी संजय बारू की तरह नहीं दिखते।

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