सिंबा का वादा अति से भी ज्यादा

Ranveer Singh and Sara Ali Khan in a scene from Simmba
Ranveer Singh and Sara Ali Khan in a scene from Simmba

इस रिव्यु को अंग्रेजी में पढ़ें: लिंक

दीपा गहलोत

रोहित शेट्टी अधिकता के मास्टर हैं और उनको रनवीर सिंह में मानो अपना जुड़वा भाई मिल गया है। सिंबा में ये उधमी किरदार फ्रेम में सीधे नहीं आता, वो रंगबिरंगे परिधानों में सजे हजारों एक्सट्रा कलाकारों के साथ नाचता हुआ आता है।

संग्राम भालेराव उर्फ सिंबा का पुलिस में भर्ती होने का मकसद साफ था कि वो पैसे कमाने के लिए भर्ती हो रहा है ना कि लोगों की मदद करने वाले रॉबिनहुड जैसा बनने के लिए। ये किरदार इस विडंबना में ही खोया हुआ रहा कि रॉबिनहुड एक अपराधी था पुलिसवाला नहीं। किरदार का तकिया कलाम है ‘माइंड इज ब्लोन’ और जब इसे फिल्म में कमीना कहा जाता है तो इसका जवाब पहले से ही तय होता है- ‘टैल मी समथिंग आई डोंट नो’ ।

शर्माना जैसे गुण रोहित शेट्टी की डिक्शनरी में नहीं है इसलिए वो इस फिल्म में अपनी ही फिल्म को शुक्रिया कहना भी नहीं भूलते। खैर कहानी पर लौटते हैं। बाजीराव सिंघम की धरती शिवगड के इस पुलिसवाले का तबादला वहां से ज्यादा मुनाफेवाले (मतलब ज्यादा रिश्वत देने वाले) गोवा के मीरामार पुलिस स्टेशन में हो जाता है।वहां वो स्थानीय भाई ध्रुव रानाडे (हल्के सोनू सूद) से इस कदर दोस्ती कर लेता है कि डॉन की मां, पत्नी और बच्चे भी उसे घर का समझते हैं।

Ranveer Singh in a poster of Simmba
सिंबा फिल्म के एक पोस्टर में रणवीर सिंह

सिंबा टिफिन सप्लाई करने वाली शगुन (सारा अली खान) की तरफ आकर्षित है और खाली समय में सड़क के बच्चों को पढ़ाने वाली मेडिकल छात्रा आकृति (वैदेशी परशुरामी) का बड़ा भाई भी बन जाता है।

जब तक सिंबा कार्टून पुलिसवाला बना रहता है फिल्म इतनी मनोरंजक बनी रहती है कि आपको इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता कि मराठी बोलने वाला ये पुलिसवाला शगुन के साथ एक रोमांटिक गाना खालिस पंजाबी में गा लेता है। रनवीर अपने जैल लगे हुए और करीने से सजे बालों, बड़ी मूंछ और चौड़ी मुस्कान से चीखते चिल्लाते रहते हैं, अपने ईमानदार साथी मोहिले (आशुतोष राणा) से भी हंसी मजाक में छेड़छाड़ करते हैं। आशुतोष राणा ईमानदार होते हैं इसलिए वो बेईमान सिंबा को सलाम करने से मना भी कर देते हैं लेकिन वो इसका बुरा नहीं मानता।

लेकिन इसके बाद फिल्म के दुर्दिन शुरु हो जाते हैं जब 80 के दशक के एंग्री यंग मैन की मर्दानगी इसमें इंट्री करती है। आकृति जासूसी करने ध्रुव के ड्रग्स के अड्डे में पहुंच जाती है (ऐसा लगता है कि इस फिल्म के किरदार कभी फिल्म नहीं देखते) और वहां पर डॉन के दोनों भाई उसका बलात्कार कर देते हैं।

अब तो सिंबा आग उगलता है कि उसकी बहन को छूने की भी हिम्मत किसी ने कैसे कर दी। अब यहीं से फिल्म थकी और बोझिल लगने लगती है। फिल्म में सिंबा अपराधियों को इस बात की सजा नहीं देता कि तुमने ऐसा क्यों किया बल्कि सजा इस बात पर मिलती है कि अगर वो तुम्हारी बेटी/ बहन होती तो ? महिलाएं या तो बलात्कार का चारा होती हैं या फिर घर पर खाना बनाती हैं, अपराधियों को पीटना, बलात्कारियों को थके हुए बोझिल एनकाउंटर में गोली मारना तो पुरुषों का काम है। इस फिल्म में महिलाओं का यही एक पक्ष दिखाया गया है। उदाहरण के लिए इस फिल्म में जो हीरोइन है वो अपने हिस्से का गाना-बजाना और डांस करके किनारे कर दी जाती है । फिल्म में एक महिला जज (अश्विनी कालसेकर) भी लेकिन वो सिर्फ खानापूर्ति के लिए ही है।

कानून को जूते की नोंक पर रखने वाली इस दुनिया के अकारण एक्शन में रोहित शेट्टी का पिछला पुलिसवाला हीरो सिंघम (अजय देवगन) भरोसा करता था कि अपराधियों से निपटने का एनकाउंटर इकलौता ही तरीका है। सिंबा अपने आस पास हंसों के झुंड की तरह इकट्ठा औरतों से पूछता है कि ‘आकृति के बलात्कारियों के साथ क्या किया जाना चाहिए’ (आकृति की मौत यहां उतनी जरुरी नहीं दिखती) और वो सारी एक स्वर में चिल्लाती हैं ‘मार डालो उसे’।

सिंबा का प्लॉट कुछ कुछ तेलगु फिल्म ‘टेंपर’ पर आधारित हैं लेकिन उस फिल्म में भी हीरो का दिल बदलने का एक भरोसा करने लायक कारण दिया गया है । अदालत का एक शानदार सीन है जिसमें तेलगु फिल्म का हीरो खुद का बलिदान करने के लिए तैयार है ताकि अपराधी बचने ना पाएं।

सिंबा में शेट्टी और कमाल करते हैं, वो दो पुलिसवालों के साथ स्लो मोशन में सिंघम (अजय देवगन मेहमान भूमिका में) को विलेन से निपटने के लिए भेज देते हैं। यही नहीं महिला जज कठोरता से ध्रुव की मां (महान थियेटर कलाकार सरिता जोशी की प्रतिभा को दो सीन में बर्बाद ही किया गया है) को नसीहत देती है कि उन्हें अपने बेटों को बेहतर ढंग से पालना चाहिए था।

इस समय जैसी मजबूत कहानी वाली फिल्में बन रही हैं, उस कसौटी पर ये फिल्म समय की चाल को पकड़ने को असफल रही है । अब ये देखने वाले पर निर्भर है कि उसे सिंघम-सिंबा मार्का फैसला ऑन द स्पॉट मंजूर है या नहीं। रनवीर सिंह के अतिशय ऊर्जावान प्रदर्शन के दम पर सिंबा हिट तो होगी ही। इस फिल्म की कमियां सिर्फ कागजों पर ही रह जाएंगी और दुख की बात ये है कि ये फिल्म उस साल के आखिर में आई है जहां ये लग रहा था कि फॉर्मूला फिल्में अब इंडस्ट्री से बाहर हो रही हैं। फिल्म के आखिर में रोहित शेट्टी ने खाकी वर्दी पहने एक और हीरो को उतार दिया है जो उनकी अगली फिल्म में नजर आएगा। कम से कम फिल्मी पर्दे पर तो अपराधियों का समय खराब ही दिख रहा है।

सिंबा
निर्देशक – रोहित शेट्टी
कलाकार- रनवीर सिंह, सारा अली खान और अन्य
रेटिंग – ढाई स्टार

अनुवाद- ईश्वरी क्रिएशंस

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