मेधा और ज़ुम्बिश: बड़ों को सीख देता बच्चों का नाटक


A scene from Medha & Zoombish
मेधा और ज़ुम्बिश का एक दृश्य

दीपा गहलोत 

हिदायत समी ने हाल ही में थियेटर यूनिट के बैनर तले रामू रामनाथन के बच्चों के नाटक मेधा और जूम्बिश को पुनर्जीवित किया जो बच्चों के बीच जाति और वर्ग की बाधाएं बनाने वाले बड़ों से सीधा संवाद करता है।

लड़कों जैसा दिखने वाली मेधा (गरिमा याग्निक) अपनी गर्भवती मां (सलोनी शुक्ला) के साथ अपने दादाजी (गिरीश शर्मा) के पास वादा कंजीर गांव आती है। मेधा के दादाजी कुंजन (अनंदिता सिंह) को संस्कृत पढ़ाते हैं। मेधा शहर की लड़की है जो लड़कों जैसा बनना चाहती है, इसलिए वो एक कबीलाई लड़के ज़ुम्बिश (प्रशांत अम्लानी) , उसके ऊंट ( मंच के पार्श्वभाग से कठपुतली ऊंट का सिर बाहर निकलता है) और उसके घोंघे, बिना सिर वाले कॉकरोचों जैसी चीजों के संग्रह से बेहद प्रभावित होती है।लेकिन दादाजी ज़ुम्बिश को अछूत समझते हैं और कुंजन की मां ने भी उसे हिदायत दी थी कि इस गंदे बच्चे के साथ ना तो खेलना है और ना ही कोई बात करनी है।

लेकिन इन सब बंदिशों के बावजूद बच्चे साथ मिलकर सारी शरारतें करते हैं जबकि उनके आस पास कबीलाई लोगों का विरोध प्रदर्शन बेदर्दी से दबाया जाता है, यहां तक कि ज़ुम्बिश के मां बाप को भी गिरफ्तार कर लिया जाता है। एक जल परियोजना का उद्घाटन भी जल्दी होना है जिसे मेधा और कुंजन जेम्स बांड बनने के चक्कर में बर्बाद कर देते हैं। मेधा के परिवार के इस मुश्किल वक्त में ज़ुम्बिश उनकी मदद के लिए आता है और अपना साहस साबित करता है।इसके बाद लोग मानते हैं कि बच्चों के खिलाफ इस तरह की दुर्भावना रखकर उन्होंने गलत किया।

नाटक में यही संदेश हास्य, गीत और नृत्य में लपेट कर दिया गया है और दर्शकों में जो उम्रदराज़ बच्चे हैं वो शायद नाटक के इन तीन उत्साही बच्चों से खुद को जोड़ सकते हैं। ये नाटक रंगमंच के ग्रिप्स स्टाइल में है। नाटक में बच्चों की भूमिका बड़ों ने की है और सभी ने बेहतरीन ऊर्जा के साथ बच्चों की मासूमियत को हूबहू मंच पर उतारा है खासकर मेधा का किरदार निभा रहीं गरिमा याग्निक ने।

प्रस्तुती में गांव के घर, आंगन और हर ग्रामीण अंचल में मिलने वाली चारपाई का साधारण डिजाइन है। ये नाटक मजेदार है लेकिन बेवकूफाना नहीं है, और ये दर्शकों में मौजूद बच्चों से दिल और दिमाग वाले एक व्यक्ति की तरह पेश आता है जिनसे उम्मीद है कि वो ज़ुम्बिश और उसके लोगों की तकलीफ देखकर अपने माता पिता से ज्यादा संवेदनशील और कम पूर्वाग्रह वाले शख्स के तौर पर बड़े होंगे।

मेधा और ज़ुम्बिश
निर्देशक – हिदायत समी
नाटककार – रामू रामनाथन
कलाकार- गरिमा याग्निक, प्रशांत अम्लानी, अनंदिता सिंह, गिरीश शर्मा और अन्य
रेटिंग – 3 स्टार 

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