10 सबसे यादगार नौशाद-मोहम्मद रफ़ी के गीत

Naushad & Mohammed Rafi
Naushad and Mohammed Rafi formed the best combination in Hindi film music

नरेंद्र कुसनूर

अगले कुछ दिनों में हिंदी फिल्म संगीत जगत के दो अजीमोशान शख्सियतों का जन्मदिन है। 24 दिसंबर को जहां गायक मोहम्मद रफी का 94वां जन्म दिवस होगा तो वहीं संगीत निर्देशक नौशाद अगर जिंदा होते तो 25 दिसंबर उनका 99वां सावन होता।

नौशाद और रफी हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया की सबसे शानदार जुगलबंदी हैं और गीतकार शकील बदायूंनी के साथ की तिकड़ी ने 1950 और 1960 के दशक के कुछ अविस्मरणीय हिट्स दिए हैं। मजेदार बात ये है कि अधिकतर गाने एवरग्रीन दिलीप कुमार पर फिल्माए गए हैं जो 11 दिसंबर को 96 साल के हुए हैं।

नौशाद-रफी के दस टॉप गानों को चुनना किसी भी लिहाज से आसान काम नहीं है। गानों को यहां साल के हिसाब से सजाया गया है और खास बात ये है कि इनमें से सात गाने दिलीप कुमार पर फिल्माए गए हैं। अब समय आ गया है अतीत की सुनहरी संगीतमय यादों में खो जाने का।

1- सुहानी रात ढल चुकी – फिल्म दुलारी (1949)

नौशाद-रफी की जोड़ी ने हालांकि 1948 में ‘ये जिंदगी के मेले’ जैसा हिट गीत दिया था लेकिन फिल्म दुलारी का गाना ‘सुहानी रात’ इतना बड़ा हिट था कि आज भी लाइव शो में बजाया जाता है और इसका इंस्ट्रूमेंटल संस्करण आज भी सुना जाता है। ए. आर कारदार की इस फिल्म में सुरेश और मधुबाला मुख्य भूमिका में थे।

2- हुए हम जिनके लिए बरबाद – फिल्म दीदार (1951)

मुहब्बत में असफलता के इस गीत के लिए नौशाद ने शुद्ध ऑर्केटा फॉर्म का इस्तेमाल किया है और रफी की आवाज धुन से लबालब है। दिलीप कुमार की इस फिल्म मे हिंदी सिनेमा का अमर गीत ‘बचपन के दिन भुला ना देना ’ भी था जिसमें घुड़सवारी की लय का भी इस्तेमाल है। इस गाने का महिला संस्करण शमशाद बेगम और लता मंगेशकर की आवाज में है।

3- मन तड़पत हरि दर्शन को आज – फिल्म बैजू बावरा (1952)

‘हरि ओम’ मंत्र के साथ शुरु हुआ ये गाना हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास का सबसे महान भक्ति गीत है। अक्सर ये भी कहा जाता है कि इस अमर भजन को तीन मुसलमानों ने मिलकर बनाया है, गीत राग मलकौस में गाया गया है। विजय भट्ट की इस फिल्म का वैसे तो हर संगीत अद्भुत है लेकिन भारत भूषण पर फिल्माया ये गाना आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखता है।

4- इंसाफ का मंदिर है ये भगवान का घर है – फिल्म अमर (1954)

दिलीप कुमार, मधुबाला और निम्मी की मुख्य भूमिकाओं वाली महबूब खान की इस फिल्म का संगीत शानदार था जिसमें लता मंगेशकर का ‘ना मिलता गम’ भी शामिल है। आत्मा की शुद्धता और ईमानदारी का संदेश देते इस गीत ’इंसाफ का मंदिर ’ गाने में रफी की आवाज अलग ही अंदाज में चमकती है।

5- ओ दूर के मुसाफिर – फिल्म उड़न खटोला (1955)

‘चले आज तुम जहां से, हुई जिंदगी पराई, तुम्हें मिल गया ठिकाना, हमें मौत भी ना आई’ जैसी उच्च कोटि की शुरुआत वाले इस गाने ने लाखों लोगों के दिलों को छुआ है। दिलीप कुमार-निम्मी की मुख्य जोड़ी वाली इस फिल्म में रफी की आवाज में ‘मोहब्बत की राहों में ’ और लता मंगेशकर की आवाज में ‘हमारे दिल से ना जाना’ जैसे गाने भी हैं।

6- मधुबन में राधिका नाचे रे – फिल्म कोहिनूर (1960)

ये गाना तो रफी के हर गीत संग्रह में होता ही होता है। ये शास्त्रीय गीत राग हमीर में गाया गया है और इसमें उस्ताद अब्दुल हलीम जफर ने सितार बजाया है। गाने की शास्त्रीय भाषा का कमाल का इस्तेमाल है।

7- नैन लड़ जइहैं – गंगा जमुना (1961)

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मस्ती भरा ये रोमांटिग गाना गाया ही बेहद गंवई अंदाज में है और इसका लय और ताल भी दिल को खुश कर देने वाला है। ये गाना उत्तर भारत के गंवई क्षेत्रों में बेहद लोकप्रिय है। नीतिन बोस की इस फिल्म में मुख्य भूमिका दिलीप कुमार और वैजयंतीमाला की थी।

8- मेरे महबूब तुझे मेरी मोहब्बत – मेरे महबूब (1963)

राजेंद्र कुमार और साधना के मुख्य किरदार वाली इस फिल्म को 8 मिनट से ज्यादा लंबे टाइटल सांग के लिए जाना जाता है। ये हिंदी फिल्म जगत में लिखे गए सबसे रोमांटिक गीतों में से एक है।

9- कोई सागर दिल से बहलता नहीं – दिल दिया दर्द लिया (1966)

ये गीत करुण रस का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। गीत में ‘मैं कोई पत्थर नहीं इंसान हूं, कैसे कह दूं गम से घबराता नहीं ’ जैसी खूबसूरत लाइने हैं। दिलीप कुमार-वहीदा रमहान स्टारर ये फिल्म एमिली ब्रॉंत की किताब वूथरिंग हाइट् पर आधारित थी।

10- आज की रात मेरे – राम और श्याम (1967)

नौशाद, बदायूंनी और रफी की तिकड़ी के जादू का एक और उदाहरण है ये गीत।इसकी शुरुआती लाइनें ही जादुई हैं ‘ये रात जैसे दुल्हन बन गई चरागों से, करुंगा उजाला मैं दिल के दागों से, आज की रात मेरे दिल की सलाी ले ले, दिल की सलामी ले ले ’

(अनुवाद- ईश्वरी क्रिएशंस)

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