रसयत्रा में सांस्कृतिक संगम

Cultural Confluence Rasayatra
Music director Kaushal Inamdar, singer Hamsika Iyer, Odissi dancer Shubhada Varadkar and Flamenco dancer Bettina Castano performed at Rasayatra

सुगुना सुंदरम

प्रबोधंकर ठाकरे क्रीडा संकुल (छत्रपति शिवाजी महाराज स्माकर समिति के तत्वाधान में) की स्थापना महान कालदृष्टा डॉक्टर रमेश प्रभु ने एक विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा बनाने के सपने के साथ की थी जो सभी के लिए हो और समाज में एक स्वस्थ और क्रियाशील जीवनशैली को प्रोत्साहित करे। पिछले कुछ वर्षों में धीरे धीरे ये सपना सच हो रहा है।

खेल संकुल के बीस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रसयात्रा नाम के एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मशहूर गायिका हंसिका अय्यर और संगीत निर्देशक कौशल इनामदार के साथ साथ मशहूर फ्लेमेंको डांस एक्सपर्ट और प्रसिद्ध ओडिशी व्याख्याता गुरु शुभदा वराडकर ने फ्लेमेंको और ओडिशी नृत्य की जुगलबंदी प्रस्तुत की। वाद्ययंत्रों के संगत में बांसुरी पर विजय तांबे, तालवाद्य तबला और मादल पर कौशिक बसु, इलेक्ट्रॉनिक रिदम पर ललित राठौड, बास गिटार पर शोवॉन मुखर्जी और की बोर्ड पर समीर चिपलुंकर मौजूद थे।

नृत्य और संगीत के कई रंगों से सजी इस शाम की संकल्पना और नृत्य निर्देशन हरफनमौला, मेधावी और ओजपूर्ण ओडिशी नृत्यांगना शुभदा वराडकर ने किया था। नृत्य नाटिका में महादेवी वर्मा की कविता से लेकर सूरदास के गाथागीत, आदिशंकराचार्य के अष्टाकाम से लेकर सहाद्री पर्वत श्रृंखला के पश्चिमी घाट के लोक संगीत तक सबका समावेश था।

शुभदा (इनका मुंबई में पंजीकृत सांस्कृतिक ट्रस्ट संस्कृता फाउंडेशन है जो वंचित बच्चों के लिए नृत्य की कक्षाएं चलाता है) स्वर्गीय गुरु केलुचरण महापात्रा की शिष्या हैं। शुभदा एक लेखिका, नृत्यांगन और प्रगतिशील व प्रयोगधर्मी नृत्य निर्देशिका हैं जिन्होंने कनुप्रिया, चित्रान्गदा, जर्नी टू डिविनिटी जैसी मौलिक ओडिशी नृत्य प्रस्तुतियां दी हैं।

कार्यक्रम में परंपरागत ओडिशी नृत्य और बैट्टिना कास्तानो के तेजतर्रार फ्लेमेंको डांस स्टाइल की जुगलबंदी के बीच बीच में रसयात्रा फेम प्रतिभावान द्वय हंसिका-कौशल का गायन भी एक सुर में गुंथा था।

आम भारतीय दर्शकों के लिए बैट्टिना के नृत्य में कैस्तानितास या स्पेनिश खरताल, पंखा या शॉल का इस्तेमाल बेहद दिलचस्प था। इसमें कलाकार कैस्तानितास या छड़ी से भारतीय ताल सिद्धांत आधारित लय पैदा कर रही थीं और साथ साथ तबला और ड्रम पर कौशिक बसु जैसे बेहद दक्ष कलाकार के साथ मुश्किल तालों को भी मिला रही थीं।

नृत्य नाटिका की शुरुआत परंपरागत ओडिशी शिव वंदना से हुई जिसके बाद सौंदर्य लहरी और स्विस संगीत की स्वरलहरियों में ओडिशी और फ्लेमेंको स्टाइल का सुंदर समावेश था, जिसमें दोनों ही कलाकार अपनी अपनी भावभंगिमाएं और लय को एक खूबसूरत सामंजस्य से जोड़ रही थीं। मिस्ट्री ऑफ बीईंग अ वूमन प्रस्तुति में फ्लेमेंको और शुद्ध ओडिशी के मेल में यही सामंजस्य और लय का समाहित होना साफ झलक रहा था।

नृत्य नाटिका की गीत रचना विद्रोही, शिक्षाविद्, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कवियित्री महादेवी वर्मा की गंभीर कविता सिगिरिया पर आधारित थी। महादेवी वर्मा की कविता – मेरी है पहली बात- की प्रस्तुति के लिए शुभदा ने हमारी पौराणिक कथा के सबसे शर्मनाक अध्याय द्रौपदी वस्त्रहरण को चुना और उसे इतने अर्थपूर्ण और मर्मस्पर्शी ढंग से एक दूसरे में बुना कि देखने वालों की आंखें भर आईं।

अपने प्रेमी से मिलने के लिए अधीर प्रेमिका अभिसारिका नायिका का आधार सूरदास की अमिट रचना झूलत श्याम को बनाया गया जो राधा और कृष्ण के बीच के गहरे प्यार की अनुभूति की रासलीला का चित्रण था।

हंसिका अय्यर और कुशाल इनामदार के संगीत निर्देशन में मराठी में स्थानीय भाषा और लावण्य का पूरा पुट था। एक में बारिश (वसाच्चा पाहिला) के धरती पर आगमन की सोंधी खुशबू का वर्णन था तो दूसरे में लावणी (महाराष्ट्र का कामोत्तेजक और देसी नृत्य) का जादू था। हंसिका की आवाज में रागों के भारीपन और तानों की तीव्रता का अनुपम मेल था। हंसिका और कुशाल ने कबीर की एक और रचना (हैना इश्कुआ) को भी प्रस्तुत किया। संगीत की पूरी प्रस्तुति में सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक सिंथेसाइजर ही वाद्ययंत्रों की इस चेतन जगत में बेमेल (सिर्फ शरीर में ना कि ताल या लय में) दिख रहा था।

ये खूबसूरत थिरकती हुई शाम दोनों ही शैलियों की शुद्द नृत्य जुगलबंदी से खत्म हुई जो भारतीय  राग पर थी और इसे विजय तांबे की सुमधुर और हृदय की गहराईयों में बस जाने वाले बांसुरी वादन ने और जादुई बना दिया था।

रसयात्रा अवसाद से उल्लास, रोमांच से शांति, आवेश से एकाकीपन के अनुभव की भावाभिव्यक्ति के सप्तक का सफर रहा।ये दुनिया की दो विभिन्न कला शैलियों के सुंदर और सुमधुर मिश्रण का सर्जन था।

 

फोटो शीर्षकसंगीत निर्देशककौशल इनामदार, गायिका – हंसिका अय्यर, ओडिशी नृत्यांगना – शुभदा वाराडकर, फ्लेमेंको नृत्यांगन – बेट्टिना कास्तानो, नृत्य नाटिका स्थल – रसयात्रा

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